सन्देश

श्रीमती लीला देवी दुकन.लछुमन

शिक्षा व मानव संसाधन, तृतीयक शिक्षा एवं वैज्ञानिक अनुसंधान मंत्री

मॉरीशस सरकार

मॉरीशस में 18-20 अगस्त तक आयोजित होने वाले 11वें विश्व हिंदी सम्मेलन में वैश्विक हिंदी समुदाय को आमंत्रित करते हुए, मुझे हार्दिक प्रसन्नता हो रही है। इस महत्वपूर्ण उत्सव में मॉरीशस के हिंदी समुदाय सहित हम आपके स्वागत के लिए उत्सुक हैं।

1976 और 1993 के विश्व हिंदी सम्मेलनों के बाद मॉरीशस में तीसरी बार इस चुनौतीपूर्ण कार्यक्रम के आयोजन का दायित्व प्रदान करने हेतु भारत सरकार और विश्व हिंदी समुदाय के प्रति मैं कृतज्ञता ज्ञापित करती हूँ।

पूर्व अनुभवों से सिद्ध हुआ है कि जब भी विश्व हिंदी सम्मेलन का आयोजन होता है तब यह एक नए मानक के रूप में मील का पत्थर सिद्ध होता है और अगले सम्मेलन को अधिक ऊँचा उठाने की चुनौती सदैव बनी रहती है। वास्तव में, भारत के माननीय प्रधान मंत्री एवं विदेश मंत्री माननीया श्रीमती सुषमा स्वराज के मार्गदर्शन में भोपाल में आयोजित 10वें विश्व हिंदी सम्मेलन की सुखद यादें 11वें सम्मेलन के संदर्भ में वैश्विक हिंदी समुदाय की आकांक्षाओं और अपेक्षाओं की ओर ध्यान आकृष्ट करती हैं। इन अपेक्षाओं की पूर्ति हेतु मॉरीशस सरकार और मेरे मंत्रालय ने बहुत पहले से, वर्ष 2016 से ही इस बृहत् आयोजन का कार्य आरंभ कर दिया है।

परंतु यह चुनौती इस सम्मेलन के आयोजन से परे है। मॉरीशस कई उच्चस्तरीय, मंत्रीस्तरीय, सरकार के नेताओं और अन्य शिखर बैठकों के लिए पसंदीदा स्थलों में से एक रहा है। यह आयोजन मॉरीशस को अंतरराष्ट्रीय मंच प्रदान करने का पुन: अवसर होगा |

अत: हम आप सबका स्वागत करने की तैयारी कर रहे हैं। प्रधान मंत्री के नेतृत्व में प्राप्त हो रहे सरकारी सहयोग, हमारी गौरवशाली एवं प्रसिद्ध हिंदी संस्थाएँ और मुख्य रूप से ओजस्वी अध्येता, लेखक, हिंदी प्रेमी और विद्यार्थी यह संकेत कर रहे हैं कि यह आयोजन अविस्मरणीय रहेगा| इस क्रम में मैं भारत सरकार के अदम्य सहयोग का रेखांकन करना चाहूँगी| यद्यपि यह आयोजन दोनों देशों के संयुक्त तत्वावधान में हो रहा है, तथापि इस कार्यक्रम की सफलता हेतु हम भारतीयों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं|

मुझे विश्वास है कि 11वाँ विश्व हिंदी सम्मेलन इस संदर्भ में किए गए विकास की स्मृति का सुखद क्षण विश्व हिंदी समुदाय को प्रदान करेगा। इस सम्मेलन का मूल उद्देश्य एवं लक्ष्य हिंदी के वैश्विक विस्तार का मार्ग प्रशस्त करना है| अब तक हुई प्रगति के बावजूद हम इस तथ्य के प्रति सचेत हैं कि कुछ मुद्दों पर विचार किया जाना शेष है|

जब आनेवाली पीढ़ी हिंदी से धीरे-धीरे दूर होती जा रही है तब हम इस भाषा से प्रवासी समुदाय को किस प्रकार जोड़कर रख पाएँगे? भूमण्डलीकरण के दौर में हम अपनी सांस्कृतिक पहचान बनाए रखने के लिए हिंदी और भारतीय संस्कृति को ढाल कैसे बना सकते हैं? हम फ़्रांसीसी भाषी और अन्य गैर अंग्रेज़ी भाषी समुदायों तक हिंदी की पहुँच कैसे बढ़ा सकते हैं? सूचना-प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हुई प्रगति का अधिक से अधिक लाभ कैसे उठा सकते हैं? भारत की बढ़ती आर्थिक व राजनीतिक शक्ति हिंदी के विकास को गति कैसे प्रदान कर सकती हैं?

इन प्रश्नों का सामना हिंदी प्रेमियों, अध्येताओं और सरकारों द्वारा समान रूप से किया जाता है और ११वाँ विश्व हिंदी सम्मेलन इन चुनौतियों पर विचार करने का सही मंच होगा| मुझे विशेष प्रसन्नता है कि मॉरीशस एक बार फिर इस ऐतिहासिक मंथन के लिए चुना गया है| मुझे विश्वास है कि विश्व हिंदी समुदाय के सक्षम विद्वान न केवल हमारी धरती को अपनी उपस्थिति से पवित्र करेंगे, बल्कि अपने ज्ञान द्वारा ऐसे गंभीर विचारों और सूचनाओं को आगे बढ़ाएँगे, जो सरकारों और सभी हिंदी प्रेमियों को भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए नीतियाँ तैयार करने और उचित कार्यान्वयन सुनिश्चित करने की क्षमता प्रदान करेंगे ।

सभी के ज्ञान से और पूरे मनोयोग से हो रहे संयुक्त प्रयासों द्वारा समस्त संसार हिंदी के उज्ज्वल भविष्य का भव्य निर्माण-स्थल बन जाएगा।

अगस्त महीने में आप सबके स्वागत के लिए मॉरीशस प्रतीक्षारत है।

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